उसकी हंसी, मेरे आंसू

उसकी हंसी, मेरे आंसू
उसकी शब्द को एक भिखारन के लिए संबोधित किया गया है, जिसके चेहरे के हाव-भाव के आधार पर वार्तालाप किया गया है, मेरे यानि मैं, खुद को उससे मन-ही-मन बाते करते हुए, एक घटना को, कहानी के रूप में प्रस्तुत कर रही हूं,..........
मुझे सफर करना बहुत पंसद है, पूरे ट्रेन में मैं अपने लिए खिड़की वाला जगह खोज ही लेती हूं, खिड़की के पास बैठकर किताबे पढ़ना या बाहर के नजारों से बाते करना मेरी आदत है,
किसी काम से मैं धनबाद जा रही थी, स्टेशन आने से 5 मिनट पहले सिंगनल नहीं मिलने से ट्रेन को रास्ते में रोक दिया गया था, सभी यात्री परेशान, कोई राज्य सरकार को तो कोई केन्द्र सरकार को दोषी ठहरा रहा था, मैं किताब बंद करके बाहर कि ओर देखने लगी,
मैंने देखा एक भिखारन एक पोल के पास ही अपनी दुनियां बना रखी है, दो गठरी है, फटे-पुराने कपड़े पहनें, दो-तीन प्लास्टिक में जूठन है, उसी में से कुछ-कुछ चुनकर खा रही थी, यह दृश्य देखकर "मेरा भारत महान " का भ्रम दुट गया, तब तक देखती हु कि उसका बाया हाथ कान के पास लगा हुआ है, ऐसा लग रहा है मानो किसी से मोबाइल पर बात कर रही है,मैं और ध्यान से देखने लगी, सच तो यहि दिख रहा है, वो बात ही कर रही थी और हंस भी रही थी, आस-पास कोई नही था, बीच-बीच में कुछ मुंह में जूठन से उठाकर डाल ले रही थी,
मैं...........क्या जमाना आ गया है, मोबाइल पर बात करने के पैसे है पर ढंग का खाना खाने के लिए
पैसा नहीं है,
भिखारन.........नही, नहीं तुम आ जाओ,मै ठिक हूं, बाये हाथ को आगे कर उसमें चेहरे को निहारते हुए
अपने बाल को संवारने हुए हंस रही थी,
मैं................ लगता है, कैमरा वाला दामी मोबाइल है, जरूर अपने प्रेमी से बात कर रही होगी, कैसे
देख-देख कर बात कर रही है,
भिखारन.......... र्शमाते हुए, हंस रही थी,
मैं..................... ट्रेन रुके 10 मिनट हो गया है, न जाने कब से बात कर रही है, माना मोबाइल कहि से
मिला गया या चुराई होगी,Bill उसका उठ रहा था, जान मेरी जा रही थी,भिखारन होकर
भी पैसे कि कद्र नही है, धनी होती तो क्या करती,
भिखारन........ बांये हाथ से लेकर दाहिने हाथ में लेकर बात करने लगी,
मैं............ हाथ दुःख गया पर बात खत्म नही हुआ, ऐसे-ऐसे भी लोग है, पता नही क्या मिलता है किसी
को इतना पकाने मेें, इससे बात करने वाला भी इसी के जैसा होगा,
"धीरूभाई अंबानी का कहना था कि मैं मोबाइल को इतनी आसानी से उपलब्ध करांऊगा, कि एक रेक्शा वाला के पास भी मोबाइल होगा, उन्हें पता था, कि इसकी लत लोगों को दिवाना बना देगी, यहां तो भिखारन के हाथ में भी है, मान गये आप कि सोच को, मोबाइल के भविष्य को आप देख पाये थे"
भिखारन........... वह जोर-जोर से हंस रही थी,
मैं................मुझे नही देखना इसकी नौटंकी, ये सब पागलपन है, मैने उधर से अपना ध्यान हटाना
चाहा, पर ध्यान हट नही रहा था, उसकी दैनिय और मानसिक अवस्था दोनों ही मेरे
ध्यान को अपनी ओर खींच रहे थे,मैं चुपचाप एक टक उसे देख रही थी,तब तक उसे प्यास
लगी, हाथ के समान को गठरी पर रखकर, अपने दानों हाथों से, एक बड़े कटोरे में रखे
पानी को पीने लगी, मेरा ध्यान गठरी पर रखे मोबाइल कि ओर गया..........
“मैं देखकर रो पड़ी, वह मोबाइल नही था, उसी आकार का कांच का आइनां था, आईने चमक रहा था, उसकी चमक मेरी आंखों पर आ रही थी,मैंने खुद थोड़ा साइट कर लिया, अचानक भिखारन को लगा, जैसे कोई उसे ध्यान से देख रहा है, उसकी नजर मेरी नजर से मिल गई, मेरा उदास और आंसू से भरी आंखे देखकर वो मुस्करा रही थी, मैंने अपने र्पस से 20 रु का नोट निकालकर खिड़की से बाहर गिरा दिया, उसने नोट को देखते हुए भी, अनदेखा किया, मानो वह कह रही हो, मैडम जी आपके 20 रू से मेरी किस्मत नही बदलने वाली.......”
तब तक ट्रेन कि सीटी से मेरा ध्यान टुट गया, ट्रेन चल पड़ी, मै अपनी नम आंखों से उसे और वो अपनी मुस्कुराते हुए लपों से मुझे देख रही थी, थोड़ी ही देर में वो मेरी आंखो से ओझल हो गई, बाद में उसने नोट को लिया या नही मैं नही जानती,
ट्रेन में सब बात रहे थे, कि 40 मिनट रोक दिया, इतना समय नष्ट हो गया, मैं सोच में पड़ गई 40 मिनट बित गया, मुझे पता भी नहीं चला, पर जाते-जाते समय मुझे एक सिख देते हुए गया,,,,,,,,,,, कभी भी किसी के बारे में पूरी जानकारी के बिना, गलत राय नही बनाना चाहिए,मैं उसे कितना गलत समझी, इस बात का अफसोंस मुझे पूरी जिंदगी रहेगा,Sorryyyyyyyyyyyyy.
